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35 साल की लीज पर मिलेगी रेलवे की जमींन

नई दिल्ली- पीएम गति शक्ति योजना के तहत रेलवे की जमीन को अब 35 साल के लिए लीज पर दिया जाएगा। इस जमीन पर कार्गो टर्मिनल, अस्पताल, केंद्रीय विद्यालय बनाए जा सकेंगे। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस फैसले की जानकारी दी। अब तक रेलवे की जमीन को 5 साल के लिए ही लीज पर दिया जाता था।

 

देश में बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के मकसद से केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को रेलवे की जमीन को 35 साल के लिए लीज पर देने का फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री गति शक्ति कार्यक्रम के तहत रेलवे की जमीन को लंबे समय के लिए लीज पर देने को मंजूरी दी गई है।

 

अनुराग ठाकुर ने बताया कि खाली पड़ी रेलवे की जमीन पर अगले 5 साल में 300 कार्गो टर्मिनल बनाए जाएंगे। इसके अलावा रेलवे की जमीन पर अस्पताल और केंद्रीय विद्यालय भी बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इससे एक लाख से ज्यादा रोजगार पैदा होंग। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना 100 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की है। इस योजना के जरिए देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछली साल 15 अगस्त को इस योजना का ऐलान किया था।

 

क्या है सरकार का फैसला?

सरकार के मुताबिक,पीएम गति शक्ति योजना को लागू करने के लिए रेलवे की जमीन को लंबे समय के लिए लीज पर दिया जाएगा। अब 35 साल के लिए रेलवे की जमीन लीज पर ले सकेंगे। पहले इसकी अवधि सिर्फ 5 साल थी. रेल मंत्रालय ने भूमि नीति में संशोधन किए थे, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूर कर लिया है। अनुराग ठाकुर ने बताया कि इसे अगले 90 दिन में लागू किया जाएगा।

 

ऐसा फैसला क्यों?

रेलवे का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। रेलवे के नाम पर सबसे ज्यादा जमीन है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, 31 मार्च 2021 तक देशभर में रेलवे के पास 4.84 लाख हेक्टेयर जमीन थी। इसमें से 62 हजार हेक्टेयर जमीन खाली पड़ी है, यानी इसका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

केंद्र सरकार के मुताबिक, देश में प्लानिंग और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए रेलवे की लैंड लीज पॉलिसी को सरल बनाने की जरूरत थी। अब तक 5 साल के लिए रेलवे की जमीन लीज पर मिलती थी। इससे कार्गो टर्मिनल में निवेश का दायरा सीमित हो जाता है। रेलवे को माल ढुलाई करना जरूरी है, ताकि लॉजिस्टिक की लागत को कम किया जा सके। माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा कार्गो टर्मिनलों को बनाने के लिए लैंड लीज पॉलिसी में बदलाव किया गया है।

 

इससे फायदा क्या होगा?

इससे माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ेगी और लॉजिस्टिक लागत कम होगी। इससे सरकार को रेलवे का रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद भी है। इसके अलावा इससे 1.2 लाख रोजगार पैदा होने की उम्मीद भी है। इससे न सिर्फ कार्गो टर्मिनल बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि बिजली, गैस, वाटर सप्लाई, टेलीकॉम केबल, सीवेज डिस्पोजल, नालियां, ऑप्टिकल फाइबर केबल, पाइपलाइन, रोड, फ्लाईओवर, बस टर्मिनल, रीजनल रेल ट्रांसपोर्ट और अर्बन ट्रांसपोर्ट जैसी सुविधाओं को विकसित करने में भी मदद मिलेगी. इतना ही नहीं, लीज पर रेलवे की जमीन पर सोलर प्लांट भी लगाए जा सकेंगे। इसके अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (झझझ) के जरिए अस्पताल और स्कूल भी बनाए जा सकेंगे। इसके लिए रेलवे की जमीन 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर की सालाना कीमत पर लीज पर मिलेगी।

 

किस रेट पर मिलेगी जमीन?

अनुराग ठाकुर के मुताबिक, कार्गो और कार्गो से जुड़ी गतिविधि के लिए 35 साल की अवधि के लिए रेलवे की जमीन को लीज पर दिया जाएगा। ये जमीन की मार्केट वैल्यू के 1.5% की दर से लीज पर दी जाएगी।

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