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इंद्रायणी नदी जलपर्णी मुक्त,सारथी पर झूठा प्रचार,नेताओं की चमकोगिरी

पिंपरी- पिंपरी चिंचवड मनपा के विभिन्न विभागों की विभिन्न महत्वपूर्ण जानकारी शहरवासियों तक पहुंचाने के लिए सारथी वेबपोर्टल का वर्षों पहले उदय हुआ था। लेकिन वर्तमान में यह वेबपोर्टल अपने मूल सिद्धांतों से भटक गया और नेताओं,संस्थाओं की चमकोगिरी कर रहा है। झूठा प्रचार कर रहा है,जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है।

जी हां! हम आपको बता दें कि सारथी वेबपोर्टल पर दावा किया गया है कि मनपा,रानजाई संस्थान देहू,अविरल श्रमदान,महेशदादा स्पोर्ट्स फाउंडेशन के सहयोग से इंद्रायणी नदी जलपर्णी मुक्त हो गई है। इस वेबपोर्टल पर पहले और बाद का फोटो अपलोड किया गया है ताकि लोगों को विश्‍वास हो जाए। लेकिन सच्चाई कुछ और है। कल हमारे फोटोग्राफर ने इंद्रायणी नदी में जलकुंभी(जलपर्णी) का बिछा जाल को अपने कैमरे में कैद किया। मजेदार बात यह है कि जिस जगह का फोटो सारथी पर अपलोड किया गया उसी जगह की इंद्रायणी नदी में जलकुंभी का फोटो हमारे संवाददाता ने खींचकर दावे की पोल खोल दी है। झूठा प्रचार और सारथी पर नेताओं की चमकोगिरी करना का क्या तात्पर्य है? सारथी का चंद नेताओं और संस्थाओं के लिए इस्तेमाल करना और पालिका के संबंधित अधिकारी,कर्मचारियों का साथ देना शहर की जनता के साथ विश्‍वासघात है।

पिंपरी चिंचवड शहर से तीन नदियां इंद्रायणी,पवना और मुठा नदी होकर गुजरती है। तीनों नदियां जलकुंभी की कैद में है। इससे मच्छरों की पैदाइश ज्यादा होने से नदी किनारे की बस्तियों को मच्छरों से डेंगू,मलेरिया जैसी भयंकर बीमारी से खतरा है। कोरोना और लॉकडाउन में लोग घरों में कैद है। ऐसी हालात में नागरिकों के स्वास्थ्य खतरे में है। तीनों नदियों से जलकुंभी हटाने के लिए 2.50 करोड रुपये का ठेका 10 दिन पहले दिया गया है। अगर इंद्रायणी नदी जलकुंभी मुक्त हो गई तो ठेका देने की क्या जरुरत थी? ठेका रद्द करके पालिका का पैसा बचाया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं होगा। क्योंकि जब मामला थानेदार अपना और चोर अपना हो तो ईमानदारी की उम्मीद करना बेकार है। पहले समस्या पैदा करना,फिर प्रसार माध्यम में समस्याओं का प्रचार करना और फिर ठेका लेकर पालिका की तिजोरी दिमक की तरह चट कर जाना,यह पुरानी स्टाइल है। पिछले दिनों बारिश हुई थी। कुछ जलकुंभी पानी के बहाव से बह कर दूसरी जगह जाकर एकत्रित हो गई। ठेकेदार भी बारिश का इंतजार करता है ताकि बरसात से जलकुंभी बह जाए और उसे मैनपॉवर लगाकर निकालने की जरुरत न पडे और ठेके की पूरी रकम डकारने का मौका मिल जाए। हर साल ऐसा ही होता है।

ऐसे जमकोगिरी नेताओं,संस्थाओं के झूठे प्रचार,चमकोगिरी में नागरिक न उलझे,सच्चाई का खुद पता करें कि क्या वास्तव में तीनों नदियां जलकुंभी की कैद से आजाद है या नहीं? पिंपरी चिंचवड मनपा में खेला हो रहा है…छलकाए जा..चमकाए जा..जनता को मूर्ख बनाए जा। नेताओं ने गंगा मइया को धोखा दिया या तो एक नदियां है। करोडों रुपये पालिका तिजोरी से निकालने और समाज में चेहरा मोहरा चमकाने की चमकोगिरी के लिए इंद्रायणी,पवना,मुठा नदी के बीच धारा में जाकर अविरल जल की कसम खाने में संकोच नहीं करेंगे। शहर के नागरिक कोरोना से लड रही है। एक एक सांस के लिए संघर्ष कर रही है। बेड नहीं,ऑक्सीजन नहीं,वेंटिलेटर नहीं,रेमडिसीवीर इंजेक्शन नहीं। चारों तरफ हाहाकार मचा है। शहर में तीन विधायक,दो सांसद है किसी ने अपने दम पर एक कोविड सेंटर खडा नहीं कर सका। किसी ने पालिका के हॉस्पिटलों में कम पडने वाले इन मेडिकल साहित्यों को खरीदकर पूर्ति नहीं कर सका। केवल पत्राचार,मीटिंग,आदेश,शासन-प्रशासन की कमियों की खिंचाई करने तक सीमित है। ये वही जनता है जो दो-तीन बार विधायक बना चुकी है। दो बार सांसद बना चुकी है। इनके वोट के दम पर सत्ता सुख,पॉवर सुख का आनंद ले रहे है। लेकिन आज वही मतदाता कोरोना की चपेट में है।एक एक सांसों की भीख मांग रही है,कोई इनके मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है। अपने चुनाव के वक्त एक एक वॉर्ड में मैनपॉवर,मसल पॉवर,मनीपॉवर लगाकर पैक कर देते है तो क्या कोरोना संकट में वॉर्ड स्तरीय जनता की मदद नहीं कर सकते। शहर में मैदान है,मंगल कार्यालय है, यहां मिनी कोविड सेंटर का निर्माण जनप्रतिनिधि कर सकते है। केवल इच्छाशक्ति की जरुरत है।

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